गीता दृष्टि
बृहत्साम तथा साम्नां गायत्री छन्दसामहम्।
मासानां मार्गशीर्षोऽहमृतूनां कुसुमाकरः।।10.35।।
तथा साम मंत्रों में मैं बृहत्साम और छन्दों में
गायत्री छन्द हूँ; मैं मासों में मार्गशीर्ष (अगहन) और
ऋतुओं में वसन्त हूँ।।
मैं सामों में बृहत्साम हूँ - भगवान् ने पहले कहा था कि, वेदों में सामवेद मैं हूँ।‘साम‘ शब्द का अर्थ है ‘गान‘। सामवेद में संकलित मंत्रों को देवताओं की
स्तुति के समय गाया जाता था। सामवेद में कुल 1875 ऋचायें हैं। जिनमें 75 से
अतिरिक्त शेष ऋग्वेद से ली गयी हैं। इन ऋचाओं का गान सोमयज्ञ के समय ‘उदगाता‘ करते थे। अब यहाँ सामवेद में भी विशेषता बताते हैं कि मैं
सामों में बृहत्साम हूँ। ऋग्वेद की जिन ऋचाओं को सामवेद में गाया जाता है-
उन्हें साम कहते हैं। उनमें एक साम वह है, जिसमें इन्द्र की सर्वेश्वर के
रूप में स्तुति की गई है- जिसे बृहत्साम कहते हैं , जिसका उल्लेख भगवान ने
यहाँ किया है। साममन्त्रों का गायन विशिष्ट पद्धति का होने के कारण अत्यन्त
कठिन है, जिन्हें सीखने के लिए वर्षों तक गुरु के पास रहकर साधना करनी
पड़ती है।मैं छन्दों में गायत्री हूँ - वेद मन्त्रों की रचना विविध छन्दों
में की गई है। इन छन्दों में गायत्री छन्द मैं हूँ। छंद शब्द 'चद्' धातु से बना है जिसका अर्थ है 'आह्लादित करना', 'खुश
करना'। यह आह्लाद वर्ण या मात्रा की नियमित संख्या के विन्यास से उत्पन्न
होता है । वैदिक साहित्य में मुख्य रूप से गायत्री, त्रिष्टुप, जगती,
वृहती आदि छन्दों का प्रयोग किया गया है। पिंगल का छन्दशास्त्र प्रसिद्ध
है।बालक का उपनयन संस्कार गायत्री मन्त्र के द्वारा ही होता
है, जिसकी रचना गायत्री छन्द में है। अत इस छन्द को विशेष महत्व प्राप्त
है। गायत्री में चौबीस अक्षर हैं और इस मन्त्र के द्वारा सविता देवता की
उपासना की जाती है।
मैं मासों में मार्गशीर्ष हूँ अंग्रेजी महीनों के अनुसार दिसम्बर और जनवरी के भाग मार्गशीर्ष हैं। भारत में, इस मास को पवित्र माना गया है। जलवायु की दृष्टि से भी यह सुखप्रद होता है- क्योंकि इस मास में न वर्षा की आर्द्रता या सांद्रता होती है और न ग्रीष्म ऋतु की उष्णता।
मैं ऋतुओं में बसन्त हूँ। ऋतुओं में खिला हुआ, फूलों से लदा हुआ, उत्सव का क्षण वसंत है।भारत की 6 ऋतुओं में से एक ऋतु है। अंग्रेज़ी कलेंडर के अनुसार फरवरी, मार्च और अप्रैल माहमें वसंत ऋतु रहती है।हिन्दी मास मे चैत्र -वैशाख का माह होता है । वसंत को ऋतुओं का राजा अर्थात सर्वश्रेष्ठ ऋतु माना गया है।
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